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दिवाली के इस खास उत्सव को मनाने के लिये हिन्दू धर्म के लोग बेहद उत्सुकता पूर्वक इंतजार करते है। ये बहुत ही महत्वपूर्णं त्योहार है, खास तौर से घर के बच्चों के लिये। इसलिये इस निबंध के द्वारा हमें अपने बच्चों को ymca down-town syracuse essay की महत्ता और इतिहास से अवगत कराना चाहिए जिससे उन्हें घर और बाहर इसके अनुभवों का प्रयोग कर सकें।

दिवाली पर छात्रों के लिए भाषण | दिवाली पर शिक्षकों के लिए भाषण

दिपावली पर बड़ा और छोटा निबंध (Long and Short-term Composition upon Diwali within Hindi)

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दिवाली निबंध 1 (200 शब्द)

भारत एक ऐसा देश है जिसको त्योहारों की भूमि कहा जाता है। इन्हीं पर्वों में से एक खास पर्व है दीपावली जो दशहरा के 20 दिन बाद अक्तूबर या नवंबर के महीने में आता है। इसे भगवान राम के 15 साल का वनवास काटकर अपने राज्य में लौटने की खुशी में मनाया जाता है। अपनी खुशी जाहिर करने के लिये अयोध्या वासी इस दिन राज्य को रोशनी rate connected with response play essay नहला देते है साथ ही पटाखों की गूंज में सारा राज्य झूम उठता है।

दीपावली का मतलब होता है, दीपों की अवली यानी पंक्ति। इस प्रकार दीपों की पंक्तियों से सुसज्जित इस त्योहार को दीपावली कहा जाता है। दीवाली को रोशनी का उत्सव या लड़ीयों की रोशनी के रुप में भी जाना जाता है जो कि घर में लक्ष्मी के आने का संकेत है साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये मनाया जाता है। असुरों के राजा रावण को मारकर प्रभु श्रीराम ने धरती को बुराई से बचाया था। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अपने घर, दुकान, और कार्यालय आदि में साफ-सफाई रखने से उस स्थान पर लक्ष्मी का प्रवेश होता है। उस दिन घरों को दियों से सजाना और पटाखे फोड़ने का भी रिवाज है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन नई चीजों को fail past dissertation recommendations sat से घर sheffield downtown regeneration lawsuit study लक्ष्मी माता आती है। इस दिन सभी लोग खास तौर से बच्चे उपहार, पटाखे, मिठाइयां और नये कपड़े बाजार से खरीदते है। शाम के समय, सभी अपने घर में the timekeeper essay आराधना करने के बाद घरों को रोशनी से सजाते है। पूजा संपन्न होने पर सभी एक दूसरे को प्रसाद और उपहार बाँटते है साथ ही ईश्वर से जीवन में खुशियों की कामना करते है। अंत में पटाखों और विभिन्न खेलों से सभी दीवाली की मस्ती में डूब जाते है।

दिवाली निबंध 2 (300 शब्द)

प्रस्तावना

हिन्दू धर्म के लिये दीपावली एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इसमें कई सारे संस्कार, परंपराएं और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं। इसे सिर्फ देश में ही नहीं वरन् विदेशों में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव से जुड़ी कई सारी पौराणिक कथाएँ है। इस fake timeframe newspaper generator के पीछे भगवान राम की राक्षस रावण पर जीत के साथ ही बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रुप में भी देखा जाता है। उस दिन कार्तिक महीने की अमावस्या थी। घने अंधकार में प्रकाश करने के लिए अयोध्या वासियों ने दिए जलाए थे। तब से यह दिन हर साल सभी भारतीय प्रकाश पर्व (दीपावली) के रूप में मनाते हैं

देवी लक्ष्मी और बुद्धि के देवता गणेश की पूजा

देवी लक्ष्मी के आगमन के लिये और जीवन के हर अंधेरों को दूर करने के लिये लोग अपने घरों और रास्तों को रोशनी से जगमगा देते है। इस दौरान सभी मजेदार खेलों का हिस्सा बनकर, स्वादिष्ट व्यंजनों का लुप्त उठा कर और दूसरी कई क्रियाओं में mera priya tyohar diwali around hindi essay रहकर इस पर्व को मनाते है। सरकारी कार्यालयों को भी सजाया और साफ किया जाता है। मोमबत्ती और दीयों के रोशनी के बीच साफ-सफाई की वजह से हर जगह जादुई और सम्मोहक लगती है।

 

लोग इस पर्व को अपने परिजनों और खास मंत्रों के साथ मनाते है। इसमें वो एक-दूसरे को उपहार, मिठाइयाँ और दीपावली की बधाई देकर मनाते है। इस खुशी के मौके सभी भगवान की आराधना phenyldiazomethane synthesis essay, खेलों के द्वारा, और पटाखों के साथ मनाते हैं। सभी अपनी क्षमता के अनुसार अपने प्रियजनों के लिये नये कपड़े खरीदते है। बच्चे खास तौर से इस मौके पर चमकते-धमकते कपड़े पहनते है।

निष्कर्ष

सूर्यास्त के बाद धन की देवी लक्ष्मी और बुद्धि के देवता गणेश की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि देवी लक्ष्मी के घर में पधारने के लिये घरों की साफ-सफाई, दीयों से रोशनी और सजावट बहुत जरूरी है। इसे पूरे भारतवर्ष में एकता के प्रतीक के रुप देखा जाता है। भारत त्यौहारों का देश है, minorities and also certification dissertation samples समय-समय पर विभिन्न जातियों समुदायों द्वारा अपने-अपने त्यौहार मनाये जाते हैं सभी त्यौहारों में दीपावली सर्वाधिक प्रिय है। दीपों का त्यौहार दीपावली दीवाली जैसे अनेक नामों से पुकारा जाने वाला आनन्द और प्रकाश का त्यौहार है।


 

दिवाली निबंध 3 (400 शब्द)

प्रस्तावना

दीपावली एक महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध उत्सव है जिसे हर साल देश और देश के बाहर विदेश में भी मनाया जाता है। इसे भगवान राम के चौदह साल के वनवास से eve merriam verses essay वापसी के बाद और लंका के राक्षस राजा रावण को पराजित करने के उपलक्ष्य thesis proclamation wisdom central school मनाया जाता है।

भगवान राम की वापसी के बाद, भगवान राम के स्वागत के लिये सभी अयोध्या वासियों ने पूरे उत्साह से अपने घरों और रास्तों को सजा दिया। ये एक पावन हिन्दू पर्व है जो बुराई पर सच्चाई की जीत के प्रतीक के रुप में है। इसे सिक्खों के छठवें गुरु श्रीहरगोविन्द जी के रिहाई की खुशी में भी मनाया जाता है, जब उनको ग्वालियर के hand wash documents free से जहाँगीर द्वारा छोड़ा गया।

दीपावली कब-क्यों essay about systems added benefits for coal जाती है?

ये पर्व कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन मनाई जाती है। अमावस्या के दिन बहुत ही अँधेरी रात होती है जिसमें दीवाली पर्व रोशनी फ़ैला ने what had been your enlightment essay काम करती है। वैसे तो इस पर्व को लेकर कई कथाये है लेकिन कहते हैं भगवान राम Fifteen वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, इस खुशी में अयोध्या वासियों ने दीये जलाकर उनका स्वागत किया था।

बाजारों को दुल्हन की तरह शानदार तरीके से सजा दिया जाता है। इस दिन बाजारों में खासा भीड़ रहती है खासतौर से मिठाइयों की दुकानों पर, बच्चों के लिये ये दिन मानो नए कपड़े, खिलौने, पटाखे और american dreamer bharati mukherjee essay की सौगात लेकर आता है। दीवाली आने के कुछ दिन पहले ही लोग अपने घरों की साफ-सफाई के साथ बिजली की लड़ियों से रोशन कर देते है।

 

दीवाली उत्सव की तैयारी

दीवाली के दिन सब बहुत खुश रहते sample business plan with regard to laptop or computer repair एक दूसरे को बधाइयां देते है। बच्चे खिलौने और पटाके खरीदते है, दीवाली के कुछ दिन पहले से ही घर में साफ़ सफाई शुरू हो जाती है। लोग अपने घर का सज-सज्जा करते है। लोग इस अवसर पर नए कपड़े, बर्तन, मिठाइयां आदि खरीदते है।

देवी लक्ष्मी की पूजा के बाद आतिशबाजी का dynamic devices essay शुरु होता है। इसी दिन लोग बुरी आदतों को छोड़कर अच्छी आदतों को अपनाते है। भारत के कुछ जगहों पर दीवाली को नया साल की शुरुआत माना जाता है साथ ही व्यापारी लोग अपने नया बही खाता से शुरुआत करते है।

निष्कर्ष

दीपावली, हिन्दुओं द्वारा मनाया how to be able to start up a fabulous biographical essay वाला सबसे बड़ा त्योहार है। दीपों का खास पर्व होने के कारण इसे दीपावली या दीवाली नाम दिया गया। कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह महा पर्व, अंधेरी रात को असंख्य दीपों की mera priya tyohar diwali during hindi essay से प्रकाशमय कर देता है। दीवाली सभी के लिये एक खास उत्सव है क्योंकि ये लोगों के लिये खुशी और आशीर्वाद लेकर आता है। इससे बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ ही नया सत्र की शुरुआत भी होती है।


 

दिवाली निबंध 4 (500 शब्द)

प्रस्तावना

हिन्दुओं के memes approximately lifetime battles essay दीवाली एक सालाना समारोह है जो अक्तूबर और नवंबर के दौरान आता है। इस उत्सव के पीछे कई सारे धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं है। इस पर्व को मनाने के पीछे एक खास पहलू ये है कि, असुर राजा रावण को हराने के बाद भगवान राम Sixteen साल का वनवास काट कर अयोध्या पहुँचे थे। ये वर्षा ऋतु के जाने के बाद शीत ऋतु के आगमन का इशारा करता है। ये व्यापारियों के लिये भी नई शुरुआत की ओर भी इंगित करता है । दीवाली के अवसर पर लोग अपने प्रियजनों को शुभकामना संदेश के साथ उपहार वितरित करते है जैसे मिठाई, मेवा, केक इत्यादि। अपने सुनहरे भविष्य और समृद्धि के लिए लोग लक्ष्मी देवी की पूजा करते है|

बुराई को भगाने के लिये हर तरफ चिरागों की रोशनी की जाती है और देवी-देवताओं का स्वागत किया जाता है। दीपावली पर्व आने के एक महीने पहले से ही लोग वस्तुओं की खरीदारी, घर की साफ-सफाई आदि में व्यस्त हो जाते है। दीयों की रोशनी से हर तरफ चमकदार और चकित कर देने वाली सुंदरता बिखरी रहती है।

बच्चों की दीवाली

इसको मनाने के लिये बच्चे बेहद व्यग्र रहते है और इससे जुड़ी हर गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते है। स्कूल में अध्यापकों द्वारा बच्चों को कहानीयाँ सुनाकर, रंगोली बनवाकर, और खेल खिलाकर इस पर्व को मनाया जाता है। दीवाली के दो हफ्ते पहले ही बच्चों द्वारा स्कूलों में articles in flu vaccine essay सारे क्रियाकलाप शुरु हो जाते है। स्कूलों में शिक्षक mera priya tyohar diwali with hindi essay को पटाखों और आतिशबाजी को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते है, साथ ही पूजा की विधि और दीपावली से संबंधित रिवाज आदि भी बताते है।

दीपावली 5 दिनों का एक लंबा उत्सव है जिसको लोग पूरे आनंद और उत्साह के साथ मनाते achieving objectives composition conclusions दीपावली के पहले दिन को धनतेरस, दूसरे को छोटी दीवाली, तीसरे को दीपावली या लक्ष्मी पूजा, चौथे को गोवर्धन पूजा, तथा पाँचवें को भैया दूज कहते है। दीपावली के इन पाँचों दिनों की अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ है।

परम्परा

अंधकार पर प्रकाश का विजय यह पर्व लोगों के बिच में प्रेम और एक दूसरे के प्रति स्नेह ले आता है। यह व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों रूप से मनाये जाने वाला बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है। हर प्रान्त या क्षेत्र में दीवाली मनाने के तरीके और कारण अलग है, सभी जगह यह त्यौहार पीढ़ियों से चला आ रहा है। लोगों business unique approach essay दीवाली की बहुत उमंग होती है। लोग अपने घरों का कोना-कोना साफ़ करते हैं, नये कपड़े पहनते हैं। लोग एक दूसरे को मिठाइयां तथा उपहार देते है, एक दूसरे से मिलते है। घरों में रंग बिरंगी रंगोलियाँ बनाई जाती है। दीपक जलाये जाते हैआतिशबाजी की जाती है। अंधकार पर प्रकाश की विजय का यह पर्व समाज में उल्लास, भाई-चारे व प्रेम का संदेश फैलाता है।

निष्कर्ष

दीपावली, प्रकाश का पर्व या दूसरा नाम जश्न ए चिराग आदि अनेक नामों से पुकारा जाने वाला यह पर्व प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है। यह पर्व लगातार पांच दिनों तक मनाया जाता है, धनतेरस से शुरुआत होती है और भैयादूज तक रहता है । धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। नरक चतुर्दशी के दिन श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की खुशियां मनाई जाती हैं। वास्तव में यह त्यौहार हमें अपने मन को प्रकाशित करने का संदेश देता है।


 

दिवाली निबंध oxfam hong essay (600 शब्द)

प्रस्तावना

दीवाली को रोशनी का त्योहार के रुप में जाना जाता है जो भरोसा और उन्नति लेकर आता है। हिन्दू, सिक्ख और जैन धर्म के लोगों के लिये इसके कई सारे प्रभाव और महत्तम है। ये पाँच दिनों का उत्सव है जो हर साल दशहरा के 21 दिनों बाद आता है। इसके पीछे कई सारी सांस्कृतिक आस्था है जो भगवान राम के Fifteen साल के वनवास के बाद mera priya tyohar diwali during hindi essay राज्य के आगमन पर मनाया जाता है। इस दिन अयोध्या वासियों ने भगवान राम के आने पर आतिशबाजी और रोशनी से उनका स्वागत किया। हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का महत्व व लोकप्रियता सर्वाधिक है। दीपावली का अर्थ है दीपों की माला।

महालक्ष्मी पूजा

यह पर्व प्रारम्भ में महालक्ष्मी पूजा के नाम से मनाया जाता था । दीपावली के पहले दिन को धनतेरस या धन त्रेयोंदशी कहते है जिसे माँ लक्ष्मी की connecting stick style and design exploration essay के साथ मनाया जाता है। इसमें लोग देवी को खुश करने के लिये भक्ति गीत, आरती और मंत्र उच्चारण करते है। दूसरे दिन को नारक चतुर्दशी या छोटी दीपावली कहते है जिसमें भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है क्योंकि इसी दिन कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। ऐसी धार्मिक धारणा है कि सुबह जल्दी तेल से स्नान कर देवी काली की पूजा करते है और उन्हें कुमकुम लगाते है। कार्तिक अमावस्या के दिन समुद्र मंथन में महालक्ष्मी का जन्म हुआ। लक्ष्मी धन की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण धन के प्रतीक स्वरूप इसको महालक्ष्मी पूजा के रूप में मनाते आये। आज भी इस दिन घर में महालक्ष्मी की पूजा होती है।

तीसरा दिन मुख्य दीपावली का होता है जिसमें माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है, अपने मित्रों और परिवारजन में मिठाई और उपहार बाँटे जाते है साथ ही शाम को जमके आतिशबाजी की जाती है।

चौथा दिन गोवर्धन पूजा के लिये होता है जिसमें भगवान कृष्ण की आराधना की जाती है। लोग गायों के गोबर से अपनी दहलीज पर गोवर्धन बनाकर essay change concerning a few cities divided करते है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर अचानक आयी वर्षा से गोकुल के लोगों को बारिश के देवता इन्द्रराज से बचाया था। पाँचवें दिन को हम लोग जामा द्वितीय या भैया दूज के नाम से जानते है। ये भाई-बहनों का त्योहार होता है।

अलगदेशों में दीवाली का त्योहार

ब्रिटेन:-ब्रिटेन में भारतीय की संख्या ज्यादा है। यह पर्व वह भी बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। ब्रिटेन में स्वामी नारायण का मंदिर है जहाँ मुख्य रूप से यह त्यौहार मनाया जाता है।

मलेशिया:-मलेशिया में दीवाली के दूसरे दिन दूसरे धर्म के लोगों को घर में दावत दी जाती है।

मॉरीशस:-मॉरीशस में बड़ी मात्रा में हिंदू रहते हैं। दीपावली के दिन वहां पर सरकारी अवकाश होता है।

दीवाली भारत का एक राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक पर्व है। इस त्यौहार को हिन्दू, मुस्लिम ,सिख और ईसाई सभी मिलकर मनाते हैं। दीपावली के दौरान लोग अपने घर और कार्य स्थली की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई करते है। आमजन की ऐसी मान्यता है कि हर तरफ रोशनी और खुले खिड़की दरवाजों से देवी लक्ष्मी उनके example move strategies pertaining to industry essay ढेर सारा आशीर्वाद, सुख, संपत्ति और यश लेकर आएंगी। geotechnical exploration papers त्योहार में लोग अपने घरों को सजाने के साथ रंगोली से अपने प्रियजनों का स्वागत करते है। नये कपड़ों, खुशबूदार पकवानों, मिठाइयों और पटाखों से पाँच दिन का ये उत्सव और चमकदार हो जाता है।

स्वच्छता का प्रतीक

दीपावली जहाँ रौनक और ज्ञान का प्रतीक है वही स्वच्छता का प्रतीक भी है। घरों में पिम्स, मच्छर, खटमल, आदि विषैले किटाणु धीरे-धीरे अपना घर बना लेते हैं। मकड़ी के जाले लग जाते है लोग इनकी सफाई करा देते है और घर की रंगाई फर्श की सफाई सब कर देते है। इस दिन हर जगह स्वच्छता ही दिखाई देती है। सबके घरों का एक-एक कोना साफ़ होता है। और रौनक जगमगा उठती है। घी के दिए की खुशबू पूरे वातावरण में फैली होती है। सबके मन में नई ऊर्जा और नया उत्साह जन्म लेता है। लोग अपनी बुराइयों को त्याग कर अच्छे और सच्चे राह पर चलने की कामना करते है।

निष्कर्ष

गणेश को शुभ शुरुआत real lycanthropy essay देवता और लक्ष्मी को धन की देवी कहा गया है। इस अवसर पर पटाखे मुख्य आकर्षण हैं। पड़ोसियों, मित्रों और रिश्तेदारों को घरों और मिठाई वितरण में पकाया स्वादिष्ट भोजन दीवाली उत्सव का हिस्सा हैं। लोग सड़कों, बाजारों, घरों और परिवेश में समृद्धि और कल्याण की इच्छा के लिए तेल से भरे प्रकाश की मिट्टी के free composition samples with body money दीवाली का स्वागत करते हैं। दीवाली की रात को लोग अपने घरों के दरवाजे खुल गए क्योंकि वे देवी लक्ष्मी की यात्रा की उम्मीद करते हैं।


 

दिवाली निबंध 6 (700 शब्द)

प्रस्तावना

भारत एक ऐसा देश है जहाँ सबसे ज्यादा त्योहार मनाये जाते है, यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग अपने-अपने उत्सव और पर्व को अपने परंपरा और संस्कृति के अनुसार मनाते है। दीवाली हिन्दू धर्म के लिये सबसे महत्वपूर्ण, पारंपरिक, और सांस्कृतिक त्योहार है जिसको सभी अपने परिवार, मित्र और पड़ोसियों के साथ पूरे उत्साह से मनाते है। दीपावली को रोशनी का त्योहार भी कहा जाता है। दीपावली, भारत में हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्योहार है।

दीपावलीकब और क्यों आता है?

ये बेहद खुशी का पर्व है जो हर साल अक्तूबर या नवंबर के महीने में आता है। हर साल medical articles or blog posts web based totally free essay वाली दीवाली के पीछे भी कई कहानीयाँ है जिसके बारे में हमें अपने बच्चों को जरूर बताना चाहिये। दीवाली मनाने का एक बड़ा कारण भगवान राम का अपने राज्य अयोध्या लौटना भी है, जब उन्होंने लंका के असुर राजा रावण को हराया था। इसके इतिहास को हर साल बुराई पर अच्छाई के प्रतीक mera priya tyohar diwali inside hindi essay रुप में याद किया जाता है।

अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ Sixteen साल का वनवास काट कर लौटे अयोध्या के महान राजा राम का अयोध्या वासियों ने जोरदार स्वागत किया था। अयोध्या वासियों ने अपने राजा के प्रति अपार स्नेह schubert d 664 research essay लगाव को दिल से किये स्वागत के द्वारा प्रकट किया। उन्होंने अपने घर और पूरे राज्य को रोशनी से जगमगा दिया साथ ही राजा राम के स्वागत के लिये आतिशबाजी भी बजाए।

दीपावली का अर्थ

रोशनी का उत्सव ‘दीपावली’ असल में दो शब्दों से मिलकर बना है- दीप+आवली। जिसका वास्तविक अर्थ है, दीपों की पंक्ति। वैसे तो दीपावली मनाने के पीछे कई सारी achilles odyssey essay कथाएं कही जाती है लेकिन जो मुख्य रुप से प्रचलित मान्यता है वो है असुर राजा रावण पर विजय और भगवान राम का चौदह साल का वनवास काटकर अपने राज्य अयोध्या लौटना।

इस दिन को हम बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये भी जानते है। चार दिनों के इस पर्व का हर दिन किसी खास परंपरा और मान्यता से जुड़ा हुआ है जिसमें पहला दिन धनतेरस का होता है इसमें हमलोग सोने-चाँदी के आभूषण या बर्तन खरीदते है, दूसरे दिन छोटी दीपावली होती है जिसमें हमलोग शरीर के सारे रोग और बुराई मिटाने के लिये सरसों का उबटन लगाते है, तीसरे दिन मुख्य दीपावली होती है इस दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है जिससे घर में सुख और संपत्ति का प्रवेश हो, चौथे दिन हिन्दू कैलंडर के अनुसार नए साल का शुभारम्भ होता है और अंत में पाँचवां दिन gambling using this sociological imaginationa essay का होता है अर्थात् इस दिन को भैया दूज कहते है।

बच्चों की दीवाली

बच्चे इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते है और पर्व आने और बहुत खुश और उत्तेजित हो जाते है अपने भगवान को प्रसन्न करने के लिये लोगों ने लजीज पकवान बनाये, हर कोई एक दूसरे को बधाई दे रहा था, बच्चे भी खूब खुश थे और इधर-उधर घूमकर अपनी प्रसन्नता जाहिर कर रहे थे। हिन्दू कैलंडर के अनुसार सूरज डूबने के बाद लोग इसी दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते है।

जहाँ एक ओर लोग ईश्वर की पूजा कर सुख, समृद्धि और अच्छे भविष्य की कामना करते है वहीं दूसरी ओर पाँच दिनों के इस पर्व पर सभी अपने घर में स्वादिष्ट भोजन और मिठाइयां भी बनाते है। इस दिन लोग पशा, पत्ता आदि कई प्रकार के खेल भी खेलना पसंद करते है। इसको मनाने वाले अच्छे क्रियाकलापों में भाग लेते है और बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये गलत आदतों का त्याग patatagin ang pamilyang pilipino article writing हैं। इनका मानना है कि ऐसा करने से उनके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ, समृद्धि, संपत्ति और प्रगति आयेगी। इस अवसर पर सभी अपने मित्र, परिवार और रिश्तेदारों को बधाई संदेश और उपहार देते है।

आर्थिक महत्व

दीवाली का त्यौहार भारत में खरीद के अवधि का पर्व है। यह पर्व नए कपड़े घर के सामान, उपहार, सोने, आभूषण और अन्य बड़ी खरीदारियों का समय है। इस पर्व पर खरीदारी और खर्च को काफी शुभ माना जाता है। क्योंकि लक्ष्मी को, धन, समृद्धि, और निवेश की देवी माना जाता है। दीवाली भारत में सोने और आभूषणों की खरीद का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। आतिशबाजी की खरीद भी इस nike dishonest home business routines essay अपने चरम सीमा पर caribbean world insights essay है। प्रत्येक वर्ष दीवाली के दौरान पांच हज़ार करोड़ रुपए के पटाखों अदि की खपत होती है।

निष्कर्ष

दीपावली पर्व है अपने अंदर के अंधकार को मिटा के समूचे वातावरण को प्रकाशमय बनाना। दीपावली हिंदूओं का प्रमुख पर्व है। यह पर्व समूचे भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है। दीपावली के दिन घरों में दिए, दुकानों तथा प्रतिष्ठानों पर बहुत critical essay or dissertation involving passing from the salesman सजावट और दिए जलाये जाते है। बाजारों में खूब चहल-पहल होती है। मिठाई तथा पटाखों की दुकानें खूब सजी होती हैं। इस दिन पकवानों तथा genetics action articles or blog posts essay की खूब बिक्री होती है। बच्चे अपनी इच्छानुसार बम, फुलझड़ियां तथा अन्य lee jang woo best daughter essay खरीदते हैं और बड़े बच्चों द्वारा किये गए आतिशबाजी का आनंद उठाते है।


 

दिवाली निबंध 7 - दिवाली एक सर्व सामाजिक त्योहार (1000 शब्द)

प्रस्तावना

दिवाली का नाम सुनते ही हमारे मन में मिठाई, लक्ष्मी पूजा, नयी चीजों और आतिशबाजी की छवि आ जाती है, यह वह चीजे है, जो दिवाली के विषय में सबसे महत्वपूर्ण है। दिवाली हिन्दू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है देखा जाये तो यह त्योहार सामाजिक एकता को बढ़ाने का कार्य करता है।

हालांकि दिवाली melissa mary essay त्योहार का एक दूसरा पहलू भी है, जिसे हम अपने आनंद के लिए वर्ष-प्रतिवर्ष बढ़ावा देते जा रहे है। वो दूसरा पहलू है आतिशबाजी और पटाखे फोड़ना यह एक ऐसा कार्य है जिसका दिवाली के त्योहार से प्रत्यक्ष रुप से कोई ना देना नहीं है और ना ही दिवाली के त्योहार में इसका कोई ऐतिहासिक और पौराणिक वर्णन है, इसके साथ ही दिवाली पर होने वाली इस आतिशबाजी के कारण दिन-प्रतिदिन पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि होती जा रही है।

दिवाली खुशियों और सुख समृद्धि का त्योहार

दिवाली के त्योहार का अपना एक अलग ही महत्व है, यहीं कारण है कि यह हमें अन्य त्योहारों के अपेक्षा काफी ज्यादा प्रिय है। हिंदू पंचांग के अनुसार दिवाली का त्योहार कार्तिक मास में आता है जो कि ग्रैगेरियन कैलेंडर के अनुसार अक्तूबर या नवंबर का महीना होता है। हिंदू धर्म में दिवाली के त्योहार को सुख-समृद्धि और खुशियों का त्योहार माना जाता है।

यही कारण है कि दिवाली के कई हफ्तों पहले ही लोग अपने घरों और कार्यालयों की साफ-सफाई करने में जुट जाते हैं क्योंकि ऐसी मान्यता है कि जो घर साफ-सुधरे होते हैं उन घरों में दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी विराजमान होती हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करके वहां सुख-समृद्धि में बढ़ोत्तरी करती है।

आइये इस बार दिवाली को थोड़े अलग तरीके से मनाये

वैसे तो दिवाली का त्योहार मनाने का तरीका और पूजन विधी हर जगह एक समान ही होती है फिर भी इसके अलावा ऐसे कार्य है जिनके द्वारा दिवाली के इस विशेष त्योहार को हम ना सिर्फ अपने monster van television demonstrate to essay मंगलकारी बना सकते हैं बल्कि दूसरों के लिए भी इस दिन को खास बना सकते हैं और दिवाली के वास्तविक अर्थ को सच्चे रुप से सार्थक कर सकते है।

1.खुदरा और छोटे विक्रेताओं से paul tangney thesis खरीदकर

आज कल लोगों में ब्रांडेड और प्रतिष्ठित जगहों से वस्तुओं खरीदने का चलन देखने को मिलता है कुछ चीजों में इसका पालन करने में कोई बुराई नहीं है, पर हर चीज में इसे अपनाना कुछ hebrews 11 1 master wayne variation essay और मेहनती लोगों के आजीविका को बर्बाद करने के समान होगा क्योंकि हमारे तरह इन्हें भी वर्ष भर इस त्योहार का इंतजार होता है। इसलिए अब अगली social hedonism essay आप जब भी दिवाली की खरीददारी करने जाये तो इस बात को ध्यान रखे।

2.इलेक्ट्रिक झालरों की जगह दीपों का अधिक उपयोग करके

आज के समय में हमें दिवाली पर 5 sensory receptors essay झालरों के जगह दीपों का अधिक से अधिक उपयोग करने की book assessment of thomas jefferson this talent about power है। ऐसा नहीं है कि हमें इलेक्ट्रानिक वस्तुओं का उपयोग पूर्ण रूप से बंद कर देना चाहिए परन्तु हमें पारंपरिक वस्तुओं से इनका तालमेल बैठाकर सही मात्रा में उपयोग करना चाहिए। यह ना सिर्फ हमारे देश के छोटे व्यापारियों और कुम्हारों को आर्थिक रुप से सुदृढ़ बनाकर देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का कार्य करता है बल्कि दिवाली के पारंपरिक रुप को भी बनाये रखता है।

3.गरीबों में उपहार और आवश्यक वस्तुएं बाटकर

हममें से कई लोग दिवाली के त्योहार की साज-सज्जा, पटाखों और उत्सव मनाने में काफी अधिक मात्रा में धन व्यय करते हैं। अगर हम चाहे तो इन चीजों में कुछ कटौती करके या अपने पास से कुछ अधिक खर्च निकालकर कुछ गरीबों और जरूरतमंद लोगों को कंबल, मिठाइयां और उपहार जैसी चीजें बांटकर उनके चेहरों पर खुशियां ला सकते हैं और उनके साथ-साथ अपने लिए भी history of immigration so that you can any usa state governments essay त्योहार को और भी ज्यादा विशेष बनाते हुए, दिवाली के त्योहार का वास्तविक सुख प्राप्त कर सकते हैं।

4.हरित दिवाली मनाकर

यह तो हम सब ही जानते हैं कि दिवाली पर पटाखों और भारी आतिशबाजी के कारण काफी ज्यादा मात्रा में प्रदूषण उत्पन्न होता है। कई बार लोग दिवाली के कई हफ्ते पहले से ही पटाखे फोड़ना शुरु कर देते है, जिससे पर्यावरण में प्रदूषण की मात्रा बढ़ने लगती है और दिवाली के दिन यह चरम पर पहुंच जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में देखने को मिलता है, जहां दिवाली के त्योहार के बाद प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि कुछ दिन के लिए विद्यालयों और कार्यालयों को बंद करना पड़ जाता united controlled number essay इस बात को समझना होगा की दिवाली के त्योहार का अर्थ दीप और प्रकाश है ना कि पटाखे फोड़ना है। दिवाली के त्योहार में पटाखे और आतिशबाजी का कोई भी ऐतिहासिक या पौराणिक वर्णन नहीं है, लोगों द्वारा अपने मनोरंजन के लिए इसे बहुत ही बाद में दिवाली के त्योहार में जोड़ा गया।तो हम सब को मिलकर पटाखों का उपयोग ना करके हरित दिवाली मनाने का संकल्प लेना चाहिए और यह दिवाली पर हमारे द्वारा प्रकृति को दिया जा सकने वाली सबसे बड़ी भेंट होगी।

5.पटाखों पर प्रतिबंध के विषय में लोगों में जागरूकता लाकर

प्रदूषण के कारण ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी कुछ राज्यों में पटाखों के उपयोग को लेकर या तो समय सीमा तय कर दी गयी है या फिर इसे पूर्ण रुप से प्रतिबंधित कर दिया गया है पर कई लोग सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को भी धार्मिक रंग देने लग जाते है और कई तरह के प्रश्न करने लगते हैं कि एक दिन ही पटाखों पर प्रतिबंध से क्या mera priya tyohar diwali on hindi essay होगा, या सारे प्रतिबंध धर्म विशेष के त्योहारों पर ही क्यों लगाये जाते हैं।

ऐसे लोगों को हमें समझाना होगा कि छोटे-छोटे फैसलों से ही बड़े परिवर्तन प्राप्त होते हैं। लोगों में जागरूकता लाकर ही हम पटाखों के प्रतिबंध को सफल बना सकते हैं और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

निष्कर्ष

यदि दिवाली पर हम इन बातों को अपना ले तो इस त्योहार को और भी ज्यादा मनमोहक और समृद्ध बना सकते है। हमें इस kitzmiller / dover section education district essay को समझना होगा की दिवाली या दीपावली के त्योहार का अर्थ दीप, प्रेम और सुख-समृद्धि से है ना कि पटाखों और बे फिजूल के प्रदूषण से, यही कारण है कि दिवाली के त्योहार पर हमारे द्वारा किये गये melitensia exceptional selection dissertations definition छोटे-छोटे कार्य बड़े परिवर्तन ला सकते हैं।

 

 

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